Friday, 13 March 2015

Alternate Nostril Breathing: ANULOM VILOM PRANAYAM (मस्तिष्क संतुलन के लिए अनुलोम विलोम)




अनुलोम-विलोम प्राणायाम नासिका द्वारा किया जाने वाला अभ्यास है। इसके अभ्यास से कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है तथा इसके ध्यान को धारण करने की भी शक्ति बढ़ती है। इसमें नासिका के दोनों छिद्रों को बारी-बारी से बंद कर श्वास (सांस लेना और छोड़ना) क्रिया की जाती है। इस क्रिया में पहले एक छिद्र से सांस लेकर कुछ क्षण तक अंदर रखने के बाद दूसरे छिद्र से बाहर छोड़ दी जाती है। 




अभ्यास कि विधि- 

  • इस प्राणायाम का अभ्यास शांत व स्वच्छ हवादार वातावरण में करें। 

  • इसके अभ्यास के लिए नीचे दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएं और बाएं पैर को मोड़कर दाईं जांघ पर और दाएं पैर को मोड़कर बाई जांघ पर रखें। 
  • अब अभ्यास बाईं नासिका से शुरू करें। दाहिने हाथ के नीचे बाईं हथेली को लगाकर रखें और दाएं हाथ के अंगूठे से दाएं नासिका छिद्र (दाहिने) नाक के छेद को) बंद कर दें। 

  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस अंदर खींचें। पूरी तरह सांस अंदर भर जाने पर अनामिका या मध्यमा अंगुली से नाक के बाएं छिद्र को बंद कर दें और दाहिने छिद्र से सांस को बाहर छोड़े। 

  • सांस लेने व छोड़ने की गति पहले धीरे-धीरे और बाद में तेजी से करें। सांस की तेज गति के समय सांस तेज गति से ले और तेज गति से छोड़ें। श्वासन क्रिया (सांस लेने व छोड़ने) की क्रिया अपनी शक्ति के अनुसार धीरे, मध्यम और तेज करें। तेज गति से सांस लेने व छोड़ने से प्राण की गति तेज होती है। इस तरह नाक के बाएं छिद्र से सांस लेकर दाएं से सांस पूरी तरह बाहर छोड़ते ही नाक के बाएं छिद्र को बंद कर दें और दाएं से सांस लें। फिर दाएं को बंद करके बाएं से सांस को बाहर निकाल दें। 

  • इस तरह दोनों छिद्रों से इस क्रिया को 1 मिनट तक करने के बाद थकावट महसूस होने पर कुछ देर तक आराम करें और पुन: इस क्रिया को करें। इस तरह इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक और फिर धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 10 मिनट तक करें। इस प्राणायाम का अभ्यास सभी को कम से कम 5 मिनट तक और अधिक से अधिक 10 मिनट तक करना चाहिए। 10 मिनट से अधिक समय तक इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। 

  • गर्मी के मौसम में अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास 3 से 5 मिनट तक ही करना चाहिए। इस प्राणायाम को करने से कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है। इस क्रिया में श्वसन करते समय ओम का ध्यान व चिंतन करते रहने से मन ध्यान के धारण योग्य बन जाता हैं।
इस क्रिया से रोगों में लाभ:-


  • कार्बन डाइ आक्साईड का निष्कासनकुशलतापूर्वक होताहै और विषाक्त तत्त्वों के बाहर निकल जाने के कारण रक्तशुद्ध हो जाता है ! 

  • मस्तिष्क-केन्द्र उत्त्रेजित होकर अपनी अधिकतम क्षमता से कार्य करने लग जाते हैं ! 

  • इससे शान्ति, विचारों में स्पष्टता और एकाग्रता की प्राप्ति भी होती है ! अत: जो लोग मानसिक कार्यों में लगे रहते हैं उन्हें यह अभ्यास करनेकापरामर्श दिया जाता है !

  • फेफड़े शक्तिशाली होते है ।

  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम से अधिक मात्रा में आक्सीजन उपलब्ध होने के कारण सम्पूर्ण शरीर का पोषण होता 

  • इस प्राणायाम के अभ्यास से स्वच्छ वायु का शरीर में प्रवेश होने से समस्त नाड़ियां जिनकी संख्या 72000 है, की शुद्धि होती है। जिससे शरीर स्वस्थ, कांतिमय एवं शक्तिशाली बनता है। 

  • इससे मन में उत्पन्न होने वाली चिंता दूर होती है और मन में अच्छे विचार उत्पन्न होते हैं। 

  • इससे मन प्रसन्न और चिंता से उत्पन्न होने वाला डर दूर हो जाता है। 

  • इससे कॉलेस्ट्रोल, ट्रग्लिसराइडस, एच.डी.एल या एल.डी.एल आदि की अनियमिताएं दूर होती हैं। 

  • यह सर्दी, जुकाम, पुराना नजला, खांसी, टॉन्सिल (गले की गांठे) ठीक करता है|

  • इससे त्रिदोष (वात, कफ, पित्त) आदि के विकार दूर होते हैं। 

  • इसके नियमित अभ्यास से 3 से 4 महीने में ही हृदय में उत्पन्न रुकावट 30 से 40 प्रतिशत समाप्त हो जाती है।

  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने से सन्धिवात (आमवात, गठिया, जोड़ों का दर्द), कम्पवात, स्नायु दुर्बलता आदि सभी रोग दूर हो जाते हैं तथा साइनस, अस्थमा आदि में लाभ होता है। 

  • यह वात रोग, मूत्ररोग, धातुरोग, शुक्र क्षय (वीर्यपतन), अम्लपित्त, शीतपित्त आदि सभी रोगों को दूर करता है।
सावधानियां - 
  • कमजोर और एनीमिया से पीड़ित रोगी इस प्राणायाम के दौरान सांस भरने औरसांस निकालने (रेचक) की गिनती को क्रमश: चार-चार ही रखें। अर्थात चार गिनती मेंसांस का भरना तो चार गिनती में ही सांस को बाहर निकालना है।

  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम करते समय यदि नासिका केसामने आटे जैसी महीन वस्तु रख दी जाए, तो पूरक व रेचक करते समय वह न अंदर जाए और न अपने स्थान से उड़े।अर्थात सांस की गति इतनी सहज होनी चाहिए कि इस प्राणायाम को करते समय स्वयं को भीआवाज न सुनायी पड़े।


Show Comments: OR
Comments
0 Comments
Facebook Comments by

0 comments:

Post a Comment