Thursday, 2 April 2015

Sun Salutation : How It Transforms Your Body(सूर्य नमस्कार:शरीर के अंग-प्रत्यंग को बलिष्ठ एवं निरोग बनाना हो तो नित्य करें सूर्य नमस्कार)

सूर्य नमस्कार एक संपूर्ण एक्सर्साइज है। इसे करने से बॉडी के सभी हिस्सों की एक्सर्साइज हो जाती है। साथ ही फ्लेक्सिबिलिटी भी आती है। सूर्य नमस्कार सुबह के समय खुले में उगते सूरज की ओर मुंह करके करना चाहिए। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और विटामिन डी मिलता है। इससे मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है। वजन और मोटापा घटाने में भी सूर्य नमस्कार लाभकारी है। 

इसे भी पढ़ें[ Benefits of Surya Namaskar: How It Transforms Your whole System (योगासनों में सर्वश्रेष्ठ सूर्य नमस्कार ,जानिए सूर्य नमस्कार के लाभ)



सूर्य की उंगली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य नमस्कार करने से आंखो की रोशनी बढती है, खून का प्रवाह तेज होता है, ब्लड प्रेशर में आरामदायक होता है,सूर्य नमस्कार करने से कई रोगों से छुटकारा मिलता है। इसके कुल 10 आसन होते हैं  जिन्हें सुबह सूर्य की रोशनी में करना होता है। इन आसनों का अभ्यास साफ-स्वच्छ व हवादार स्थान पर करें तथा जहां भरपूर मात्रा में धूप आपके शरीर पर पड़ सके, वहां इसका अभ्यास करना चाहिए। इन आसनों को क्रम बद्ध रूप से करना चाहिए। सूर्य नमस्कार नीचे दिए तरीके से किया जा सकता है-
STEP ONE -
  • प्रणामासन -Pranamasana (Prayer pose)

         
पहले सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाएँ। फिर दोनों हाथों को कंधे के समानांतर उठाते हुए दोनों हथेलियों को ऊपर की ओर ले जाए। हथेलियों के पृष्ठ भाग एक-दूसरे से चिपके रहें। फिर उन्हें उसी स्थिति में सामने की ओर लाएँ। तत्पश्चात नीचे की ओर गोल घुमाते हुए नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएँ। 

STEP TWO-
  • हस्तउत्तानासन-Hastauttanasana (Raised Arms pose)


श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा कमर से पीछे की ओर झुकते हुए भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएँ। यह अर्धचक्रासन की स्थिति मानी गई है।

STEP THREE-
  • हस्तपादासन-Hasta Padasana (Hand to Foot pose)

तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएँ-बाएँ पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। इस स्थिति को पाद पश्चिमोत्तनासन या पादहस्तासन की स्थिति कहते हैं।
STEP FOUR-
  • अश्वसंचालासन -Ashwa Sanchalanasana (Equestrian pose)

इसी स्थिति में हथेलियाँ भूमि पर टिकाकर श्वास को भरते हुए दाएँ पैर को पीछे की ओर ले जाएँ। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को ऊपर उठाएँ। इस मुद्रा में टाँग तनी हुई सीधी पीछे की ओर और पैर का पंजा खड़ा हुआ रहना चाहिए। इस स्थिति में कुछ समय रुकें।

STEP FIVE-

    अधोमुखश्वानासन-Adho Mukha Svanasana(downward facing dog pose)

श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए हुए बाएँ पैर को भी पीछे ले जाएँ। दोनों पैरों की एड़ियाँ परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएँ। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कंठ में लगाएँ।

STEP SIX-
  • अष्टांगनमस्कारासन-Ashtanga Namaskara(Salute With Eight Parts)


श्वास भरते हुए शरीर को पृथ्वी के समानांतर, सीधा साष्टांग दंडवत करें और पहले घुटने, छाती और ठोड़ी पृथ्वी पर लगा दें। नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठाएँ। श्वास छोड़ दें। श्वास की गति सामान्य रखें।
STEP SEVEN-
  • भुजंगासन-Bhujangasana (Cobra pose)

 
इस स्थिति में धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएँ। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। इस स्थिति को भुजंगासन की स्थिति कहते हैं। 

STEP EIGHT-

    अधोमुखश्वानासन-Adho Mukha Svanasana(downward facing dog pose)

यह स्थिति पाँचवीं स्थिति के समान है। जबकि हम ठोड़ी को कंठ से टिकाते हुए पैरों के पंजों को देखते हैं। 

STEP NINE-
  • अश्वसंचालासन -Ashwa Sanchalanasana (Equestrian pose)

यह स्थिति चौथी स्थिति के समान है। इसमें पीछे ले जाए गए दाएँ पैर को पुन: आगे ले आएँ।

STEP TEN-
  • हस्तपादासन-Hasta Padasana (Hand to Foot pose)

यह स्थिति तीसरी स्थिति के समान हैं। फिर बाएँ पैर को भी आगे लाते हुए पुन: पाद पश्चिमोत्तनासन की स्थिति में आ जाएँ।

STEP ELEVEN-


  • हस्तउत्तानासन-Hastauttanasana (Raised Arms pose)

यह स्थिति दूसरी स्थिति के समान हैं। जिसमें पाद पश्चिमोत्तनासन खोलते हुए और श्वास भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाएँ। उसी स्थिति में हाथों को पीछे की ओर ले जाएँ साथ ही गर्दन तथा कमर को भी पीछे की ओर झुकाएँ अर्थात अर्धचक्रासन की मुद्रा में आ जाएँ।

STEP TWELVE-
  • प्रणामासन -Pranamasana (Prayer pose)

 
यह स्थिति पहली स्थिति की भाँति रहेगी। अर्थात नम:स्कार की मुद्रा रहेगी | 





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