Friday, 1 May 2015

Frozen shoulder: symptoms, diagnosis and self-care(कही आप फ्रोज़ेन शोल्डर/कैप्सुलाईटिस/कंधे की अकडन से परेशान तो नही )

   कही आप फ्रोज़ेन शोल्डर/कैप्सुलाईटिस/कंधे की अकडन से परेशान तो नही    


   Frozen shoulder: symptoms, diagnosis and self-care

   परिचय-                                                                                                                                                                        
फ्रोजेन शोल्डर यानी  कंघे में अकड़न। आजकल ये बीमारी आम हो गई है। अगर किसी व्यक्ति के कंधें अकड़ जाते हैं सही तरह से काम नहीं करतेकिसी भी काम को करने में या सामान को उठाने में रोगी को कंधों में बहुत तेज दर्द होता है  तो वह फ्रोजेन शोल्डर नामक बीमारी से ग्रसीत हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति के कंधें अकड़ जाते हैं सही तरह से काम नहीं करतेकिसी भी काम को करने में या सामान को उठाने में रोगी को कंधों में तेज दर्द होता है। ऐसा रोगी की कण्डरा में जलन के कारण होता है जिसकी मदद से ही कंधे इधर-उधर घूमते हैं। कभी-कभी कंधे की उपास्थि में सूजन आने के कारण भी कंधे का काम करना कम हो जाता है।


     फ्रोजेन शोल्डर के कारण :-                                                                      


फ्रोजेन शोल्डर कई कारणों से हो सकता है। एक सर्वे के मुताबिक फ्रोजेन शोल्डर वर्किंग क्लास और कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले लोगों में अधिक पाई जाती है। इसके अलावा काफी समय तक कंधे एक ही पॉजीशन में रखना, बहुत देर तक एक की कंधे पर अधिक भार उठाए रखना, कंधे से बहुत  ज्यादा काम न लेना, हड्डियों का कमजोर होना। इतना ही नहीं कई बार फ्रोजेन शोल्डर की समस्या कंघे को किसी तरह का आघात और चोट लगने पर भी होने लगता है।
काफी समय तक कंधे को न हिला पाना, कंधे से ज्यादा काम न लेना, बहुत देर तक एक ही अवस्था में बैठे रहने से रोगी के कंधे जाम हो जाया करते हैं। इसके अलावा मधुमेह के रोग में और बुढ़ापे में भी अक्सर कंधे अकड़ जाया करते हैं।



    फ्रोजेन शोल्डर के लक्षण:-(SYMTOMS OF FROZEN SHOUDER)         

[फ्रोजेन शोल्डर के दौरान कंघा बिल्कुल सूज जाता है और अकड़न के कारण कठोर हो जाता है जिससे हाथ हिलाना बहुत मुश्किल होता है और हिलाने पर तीव्र दर्द होने लगता है। 

[कंधे को किसी भी दिशा में मोड़ने में रोगी को बहुत दिक्कत होती है। 

[कंधे का दर्द रोगी की गर्दन और उसके ऊपर के भाग में फैल जाता है। 

[हाथ की काम करने की गति बहुत धीमी हो जाती है और रात के समय दर्द अधिक परेशान करने लगता है। छोटे-छोटे काम जैसा कंघी करना, बटन बंध करना इत्यादि करना भी मुश्किल हो जाता है।

[हाथ को पीछे की ओर करना होता है तो उसके कंधे में बहुत तेज दर्द होता है। 

[कई बार फ्रोजन शोल्डर के तहत बहुत ज्यादा सूजन और तेज दर्द अचानक शुरु हो जाता है और कंघे में ऐंठन उत्पन्न होने लगती है जो कई मिनटों या फिर घंटो तक भी रह सकती है। यह समय कई महीनों या सालों तक भी हो सकती है।कंधे को किसी भी दिशा में मोड़ने में रोगी को बहुत दिक्कत होती है।

[रोगी अगर बालों में कंघी करने के लिए हाथ उठाता है या कपड़ों के बटन आदि खोलता है तो उसको बहुत ज्यादा परेशानी होती है।

[रोगी को अगर अपने हाथ को पीछे की ओर करना होता है तो उसके कंधे में बहुत तेज दर्द होता है। 

[कंधे का दर्द रोगी की गर्दन और उसके ऊपर के भाग में फैल जाता है।

   कंधे की अकड़न के रोगी के लिए क्या-क्या सावधानी जरूरी है-                



[रोगी को रोजाना हाथों और कंधों के हल्के-फुल्के व्यायाम करना बहुत जरूरी है। इससे रोगी के कंधे चलते रहते हैं और जाम नहीं होते।

[रोगी के जिस कंधे में अकड़न हो उस कंधे से हल्का काम करते रहना चाहिए ताकि वह कंधा थोड़ा बहुत चलता रहे।

[रोगी को रोजाना ताजी सब्जियां खानी चाहिए।

[नशीले पदार्थ, चाय, खट्टे फल और चीनी का सेवन रोगी को नहीं करना चाहिए।

[रोगी के कंधे अकड़ जाने पर अगर गर्म पानी को बोतल में भरकर या गर्म पट्टी से सिंकाई की जाए तो रोगी के लिए अच्छा रहता है।

[कंधे की पूरी गतिविधियों को सामान्य होने में कभी-कभी 6 महीने भी लग सकते हैं इसलिए रोगी को सब्र से काम लेना चाहिए।


      एतिहायत और रोकथाम:-                                                  

 [ इस बीमारी के होने के दौरान कंधें के हल्के-फुल्के व्यायाम बेहद जरूरी है।
[ खान पान का खास ध्यान रखें और ताजा फल-सब्जियां, जूस और पॉष्टिक आहार का सेवन जरूरी है।
[ गर्म पानी से सिंकाई करनी चाहिए।
[प्रतिदिन मसाज करना भी बेहतर उपाय है।
[ रात के समय में कम से कम 1 घण्टे तक ठंडा लेप कंधे पर करना चाहिए।
[ फ्रोजेन शोल्डर के तहत जरूरी है कि कंधे के दर्द को कम किया जाए और कंधे में मूवमेंट लाई जाए।
[ हालांकि कंघों में दर्द या अकड़न से निजात पाने के लिए योग भी किया जा सकता है इसमें पर्वतासन सबसे अच्छा रहता है जो कंघों की अकड़न दूर करने के साथ-साथ रीढ़ के सभी जोड़ों के बीच का तनाव कम होता है। लेकिन डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है क्योंकि जरा सी लापरवाही आपको जोखिम में डाल सकती है।

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