Saturday, 31 October 2015

Yoga Asanas To Reduce Stubborn Belly Fat Very Fast : सात दिनों में कम करें पेट की चर्बी : पेट की चर्बी घटाने में मदद करेंगे ये योगासन



                      Yoga Asanas To Reduce Stubborn Belly Fat Very Fast         



क्या आप वज़न घटाने के सारे नुस्खे आज़माकर थक चुके हैं? हमारे पास आपकी परेशानी का जवाब है योग। व्यायाम की यह विधि दुनिया की दो बेहतरीन चीज़ों का संगम है चुस्ती और ध्यान । वजन घटाने के लिए योग को सबसे कारगर और सरल तरीका माना जाता है।

योग किसी भी उम्र वर्ग के लिए खासा लाभदायक है। इसकी सबसे कमाल की चीज़ है कि चाहे आपका वज़न कितना भी हो या आप शरीर के जिस भी हिस्से से चर्बी घटाना चाहते हों योगासनों के माध्यम से सब कुछ पाया जा सकता है। ये जोड़ों पर ज़्यादा असर नहीं डालता और शुरुआती अभ्यास अच्छे प्रशिक्षक के निरीक्षण में किया जाए तो चोट लगने की आशंका बिलकुल नगण्य हो जाती है। 
गर्भवती महिलाओं को भी कुछ विशेष सावधानियों के साथ योग करने की सलाह दी जाती है। ज्ञात हो कि तनाव के चलते कई तरह की बीमारियां जन्‍म लेती हैं। लेकिन योग के आसनों के जरिये इससे निजात पाया जा सकता है। वजन घटाने और फिट रहने के लिए योग काफी कारगर है और इससे तनाव का स्‍तर घटने के साथ व्‍यक्ति का आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ता है। नीचे योग के कुछ आसनों के बारे में जिक्र किया गया है, जिसको निरंतर करने से वजन घटाने में काफी मदद मिलती है।

आइए जानें ऐसे आसनों के बारे में जिनसे आपको पेट की चर्बी कम करने में आसानी होगी। 

        चक्रासन/ उर्ध्व धनुरासन:                                                                            


चक्रासन योग में शरीर का आकार चक्र / पहिए के समान होने के कारण इसे Wheel Pose भी कहा जाता हैं। धनुरासन के विपरीत होने के कारण इसे उर्ध्व धनुरासन भी कहा जाता हैं। चक्रासन योग के तहत एक अहम् आसन है, जिसके जरिये आप अपने पेट को दुरुस्त और सम्बंधित मांसपेशियों को पूरी तरह ठीक रख सकते हैं |  

        चक्रासन करने की विधि :-                                                                         
  •  सबसे पहले जमीन पर पीठ (Back) के बल शवासन में लेट जाए।  
  • दोनों पैरों को मोड़कर एडियों को नितम्बो (Hips) के पास ले आए और घुटनों को खड़ा कर दे।    तलवों को जमीन पर अच्छे से जमा दे।
  • दोनों पैरों को एक दुसरे से डेढ़ फिट की दुरी पर रखे।
  • दोनों हाथों को कुंहनियो (Elbow) में मोड़कर हथेलियों को जमीन पर कान के पास घुमाकर इस प्रकार रखे की उंगलियों के आगे का हिस्सा कंधो (Shoulder) की ओर रहे तथा हथेलियों जमीन पर समतल रहे।
  •  अब शरीर को ढीला रखे और गहरी सांस लें।
  • पैर और हाथ को सीधा करते हुए कमर, पेट  और छाती को ऊपर की ओर उठाए। सिर को कमर की ओर ले जाने का प्रयास करे। शरीर को ऊपर उठाते समय सांस रोककर रखे।
  • आखरी स्तिथि में पीठ को क्षमतानुसार चक्राकार (Circular) बनाने की कोशिश करे।
  • शुरूआत में इस स्तिथि में 15 सेकण्ड तक रुकने की कोशिश करे। अभ्यास के साथ आप 2 मिनिट तक भी रुक सकते हैं। 
  • अंत में फिरसे शरीर को निचे लाकर पूर्ववत पीठ के बल लेटकर शवासन करे।

        चक्रासन करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?                                         
चक्रासन करते समय नीचे दी हुई सावधानी बरतनी चाहिए :

  •  उच्च रक्तचाप (Hypertension), ह्रदय रोग, गर्भिणी, हर्निया, नेत्र दोष, जिनका कोई ऑपरेशन हुआ है या चक्कर (Vertigo), गर्दन या कमर के Spnodylitis से पीड़ित व्यक्ति ने यह आसन नहीं करना चाहिए। 
  • चक्रासन करना कठिन कार्य होने के कारण अपने क्षमता से अधिक प्रयास न करे। 


        भुजंगआसन :                                                                                             


इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए नाग के समान हो जाती है इसीलिए इसको नाग आसन, भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। इस आसन से पेट की चर्बी घटती है तथा रीढ़ की हड्डी सशक्त बनती है। दमे की, पुरानी खांसी अथवा फेफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी हो, तो उनको यह आसन करना चाहिए। इससे बाजुओं में शक्ति मिलती है। मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते हैं। पीठ की हड्डियों में रहने वाली तमाम खराबियां दूर होती है। कब्ज दूर होता है। इस आसन को करते समय अकस्मात् पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें।

        भुजंगासन करने की विधि:-                                                                         
  •  सबसे पहले पेट के बल लेट जाईए। 
  • पैरो को सीधा, लम्बा फैला कर रखना हैं। 
  • अपने हथेलियों को कंधो के निचे जमीन पर रखे। 
  • माथा (Forehead) को जमीन से लगाकर रखे। 
  • अपने कुंहनियो की दिशा ऊपर आसमान की ओर रखे। 
  • अब धीरे-धीरे सिर को और कंधो को जमीन से ऊपर उठाइये। सिर को ऊपर उठाते समय श्वास अंदर लेना हैं।  
  •  हाथो का अंदरूनी हिस्सा शरीर से स्पर्श कर रखे। 
  •  हाथो पर अधिक दबाव न आने दे।
  • अब धीरे-धीरे हाथों को कुंहनियो से सीधा कर, पूरी पीठ को पीछे की ओर झुकाना हैं। नाभी को जमीन से लगाकर रखे। इस स्तिथि में श्वास सामान्य रखे। इस स्तिथि में 20 से 30 सेकण्ड तक रुके और अभ्यास के साथ अंतराल बढ़ाये।  
  • इस अंतिम स्तिथि में कुछ देर रुकने के बाद धीरे-धीरे नीचे आइए तथा पूर्व स्तिथि में विश्राम करे। यह क्रिया श्वास को बाहर छोड़ते हुए करना हैं। 
        भुजंगासन करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?                                      
भुजंगासन करते समय नीचे दी हुई सावधानी बरतनी चाहिए | 
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension), ह्रदय रोग, गर्भिणी, हर्निया, नेत्र दोष, जिनका कोई ऑपरेशन हुआ है या चक्कर (Vertigo), गर्दन या कमर के Spnodylitis से पीड़ित व्यक्ति ने यह आसन नहीं करना चाहिए। 
  • चक्रासन करना कठिन कार्य होने के कारण अपने क्षमता से अधिक प्रयास न करे। 


        धनुरासन :                                                                                                 


इस आसन को करने से शरीर की आकृति खींचे हुए धनुष के समान हो जाती है, इसीलिए इसको धनुरासन कहते हैं। यह आसन मेरुदंड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। पेट की चर्बी कम होती है। हृदय मजबूत बनाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। कब्ज दूर होकर जठराग्नि प्रदीप्त होती है।

        धनुरासन करने की विधि :-                                                                        

  •  पेट के बल लेट जाए।  
  • पैरों को घुटनों (Knee) में मोड़कर एडियों (Heel) को कूल्हों (Hips) पर ले आए।  
  • दोनों पैरो के टखनों (Ankle) को हाथों से पकड़िये।  
  • अब हाथों को सीधा रखते हुए पैरों को पीछे की ओर खींचना हैं और कूल्हों के ऊपर उठाना हैं। यह क्रिया करते समय श्वास अंदर लेना हैं। 
  • इसी समय जांघो (Thighs) को और सिर को जमीन से जितना ऊपर उठा सकते है उतना अपने क्षमतानुसार प्रयास करें।  
  •  दोनों घुटनों को साथ में रखने का प्रयास करें। 
  • यह क्रिया आप अपने क्षमतानुसार 10 से 20 सेकंड तक करे और इस दरम्यान दीर्घ श्वसन लेना और छोड़ना चालू रखे।  
  • अगर आप जांघों को नहीं उठा सकते है तो केवल सिर भी उठा सकते हैं। इसे सरल धनुरासन कहा जाता हैं।   
  • अंत में श्वास छोड़ते हुए पैरो को और सिने को जमींन पर धीरे से रखना हैं। 

        धनुरासन करते समय क्या एहतियात बरतने चाहिए ?                                        
धनुरासन करते समय निचे दिए हुए एहतियात बरतने चाहिए :
  • हर्निया, पेट में अल्सर, उच्च रक्तचाप, गर्दन में चोट, पेट का ऑपरेशन, सिरदर्द, माइग्रेन और आंत की बीमारी से पीड़ित व्यक्तिओं को यह आसन नहीं करना चाहिए। 
  • गर्भिणी महिला को यह आसन नहीं करना चाहिए। 
  • अत्यधिक कमर दर्द होने पर प्रारंभ में केवल सरल धनुरासन करे और अभ्यास के साथ धनुरासन करना चाहिए। 


        पश्चिमोत्‍तनासन :                                                                                    


इसमें पीठ में खिंचाव उत्पन्न होता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं. इस आसन से शरीर की सभी मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। पशिच्मोत्तासन के द्वारा मेरूदंड लचीला व मजबूत बनता है जिससे बुढ़ापे में भी व्यक्ति तनकर चलता है और उसकी रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है।  इसके अभ्यास से शरीर की चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है तथा मधुमेह का रोग भी ठीक होता है।

        पश्चिमोत्तानासन करने की विधि:-                                                            
  • सर्वप्रथम अपने पैर को सामने की ओर सीधी करके बैठ जाएं। दोनों पैर आपस में सटे होने चाहिए। पीठ को इस दौरान बिल्‍कुल सीधा रखें |
  • फिर अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छुएं। ध्‍यान रखें कि आपका घुटना न मुड़े और अपने ललाट को नीचे घुटने की ओर झुकाए।
  •  5 सेकेंड तक रुकें और फिर वापस अपनी पोजीशन में लौट आएं। यह पोजीशन किडनी की समस्‍या के साथ क्रैम्‍स आदि जैसी समस्‍या से भी निजात दिलाता है।
        पश्चिमोत्तानासन करते समय क्या एहतियात बरतने चाहिए ?                          
पश्चिमोत्तानासन करते समय निचे दिए हुए एहतियात बरतने चाहिए :
  • हर्नियापेट में अल्सरउच्च रक्तचापगर्दन में चोटपेट का ऑपरेशनसिरदर्दमाइग्रेन और आंत की बीमारी से पीड़ित व्यक्तिओं को यह आसन नहीं करना चाहिए। 
  • गर्भिणी महिला को यह आसन नहीं करना चाहिए। 


        चक्‍की चलनासन :                                                                                 


योग का यह आसन पेट की चर्बी को दूर करने में काफी कारगर है। इससे वजन कम करने में भी फायदा मिलता है।

        चक्की चलासन करने की विधि:-                                                            
  •  पहले आप जमीन पर आराम से बैठ जाएं। इस दौरान अपने पैरों को सामने की ओर से फैलाएं।
  •  दोनों पैर आपस में सटे रहें, इस बात का ध्‍यान रखें।
  • अब अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाकर पकड़ लें और फिर बिना घुटनों को मोड़े सर्कुलर (चक्र के तौर पर) दिशा में घुमाएं।
  • दस बार इस आसन को घड़ी की दिशा में घुमाएं और फिर कुछ देर रुकने के बाद इस बार घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाएं। फिर धीरे-धीरे छोड़ दें।

     इस पोस्ट में प्रयुक्त चित्र google image से लिए गए हैं , यदि किसी को इससे आपत्ति है तो vsmskb@gmail.com पर संपर्क करे |

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