Wednesday, 17 February 2016

Yogas for Thyroid Treatment : Yoga can help relieve symptoms of thyroid disorders :जानें ! हम कैसे योग के द्वारा थायरॉयड को कंट्रोल कर सकते हैं |



     Yogas for Thyroid Treatment: Yoga can help relieve symptoms of thyroid disorders   

आजकल थाइरोइड विकार का होना जनजीवन में उच्चरक्तचाप एवं मधुमेह की तरह बहुत आम पाया जाने लगा है। अमेरिकन थाइरोइड एसोसिएशन (ऐ टी ऐ) के अनुसार, अमेरिका में लगभग 20 मिलियन लोग किसी न किसी गलग्रंथि (थाइरोइड) विकार से ग्रसित हैं जिस में से 60% लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं होती हैl यह स्थिति पुरुषों के मुकाबले अधिकतर महिलाओं में पाई जाती है। इसके कारणों में से प्रमुख कारण हमारी तनावग्रस्त जीवनशैली है। हालाँकि बढ़ती संख्या के बावजूद, आजकल थाइरोइड पीड़ितों के लिए कई प्रकार के उपचार उपलब्ध हैंl निसंदेह किसी भी उपचार में समय लगता हैl लेकिन हर्ष की बात यह है कि योगाभ्यास एवं ध्यान से थाइरोइड के उपचार में प्राकृतिक रूप से मदद मिलती हैl अपने नियमित उपचार में कुछ मिनट योगाभ्यास को भी शामिल करें जो आपके जीवन को तनावमुक्त बनाने में सहायता करता है एवं आपके दैनिक जीवन को सरल एवं आनंदमय बनाता है।


योग क्रियाओं का नियमित अभ्यास कर आप अपने थाइरोइड रोग को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर कोई भी योग करते समय आपको किसी प्रकार की परेशानी होती है तो योग विशेषज्ञ और डॉक्टर की सलाह अवश्य लेना चाहिए। ध्यान रहे की कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह अपनी थाइरोइड की दवा बंद न करे। नियमित योग अभ्यास करने से आपका थाइरोइड रोग नियंत्रित हो सकता है और दवा का dose धीरे-धीरे कम हो सकता हैं। कुछ थाइरोइड के रोगियों में शुरूआती दौर में ही योग्य उपचार, आहार, व्यायाम और योग करने पर थाइरोइड रोग ठीक भी हो सकता हैं।


ऐसे कई योग है जिनका रोज अभ्यास करने से Thyroid रोग में लाभ मिल सकता हैं। ऐसे विशेष योग क्रियाओं की जानकारी निचे दी गयी हैं।

        सर्वांगासन / Sarwangasan:                                                                                
थायरॉइड पर नियंत्रण के लिए अक्सर डॉक्टर कसरत या शारीरिक श्रम की सलाह देते हैं। ऐसे में अगर इस पर नियंत्रण के लिए आप किसी कारगर उपाय की तलाश में है तो सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से आपको मदद मिल सकती है। इस आसन से थायरॉइड ग्लैंड नियंत्रित होता है और शरीर के पाचन से लेकर रीढ़ की हड्डी तक की क्रियाएं सुचारू होती हैं।

 
        सर्वांगासन करने की विधि :                                                                                        
1. सबसे पहले किसी साफ जगह पर चटाई या दरी को बिछाएं।
2. पीठ के बल लेटें। और दोनों पैरों को एक साथ मिला लें।
3. दोनों हाथों को जमीन पर रखें। और शरीर को ढीला रखें।
4. सांस लेते हुए आराम-आराम से पैरों को बिना मोड़े उपर की तरफ उठाएं।
5. जैसे-जैसे पैर उपर की तरफ उठाएं वैसे-वैसे कमर को भी उपर की तरफ उठाएं।
6. पैरों और पीठ को 90 डिग्री तक उठाने का प्रयास करें।
7. हाथों के जरिए पीठ और कमर को उपर की तरफ उठाएं।
8. यह योग करते समय मुख उपर आकाश की तरफ होना चाहिए। और कुहनियां जमीन से टिकी हुई हों।
9. इस योग को करते वक्त हाथों से पीठ को सहारा देते समय हाथों की उंगलियां एक दूसरे के सामने हों। और अंगूठों की दिशा पेट की तरफ हों।
10. अब वापस पहले की अवस्था में आएं।
11. यह आसन शरीर की क्षमता के अुनसार ही करें।

        सूर्यनमस्कार / Sun Salvation                                                                               
ऐसे तो सूर्यनमस्कार सम्पूर्ण शरीर के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं परन्तु इसका Thyroid रोग में विशेष महत्त्व हैं। सूर्यनमस्कार करते समय गर्दन को आगे-पीछे करना पड़ता है और गहरी साँसे लेना और छोड़ना पड़ता हैं। इस क्रिया से Thyroid ग्रंथि पर दबाव पड़ता हैं और उसके आस-पास के स्नायु क्रियाशील होते हैं। 


सूर्यनमस्कार कैसे करते है और इसके लाभ संबंधी संपूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ click करे सूर्यनमस्कार विधि और लाभ !

        भुजंगासन / Cobra Pose :                                                                                        
इस आसान में गर्दन को उठाकर सांस लेने और छोड़ने की क्रिया करना पड़ता है जिससे Thyroid ग्रंथि पर दबाव पड़ता है और वह सुचारू रूप से कार्य करती हैं।


        भुजंगासन करने की विधि:-                                                                                   
1.एक स्वच्छ और समान जगह पर चटाई / दरी बिछाकर यह आसन करे। 
2.सबसे पहले पेट के बल लेट जाईए। 
3.पैरो को सीधा, लम्बा फैला कर रखना हैं। 
4.अपने हथेलियों को कंधो के निचे जमीन पर रखे। 
5.माथा (Forehead) को जमीन से लगाकर रखे। 
6.अपने कुंहनियो की दिशा ऊपर आसमान की ओर रखे। 
7.अब धीरे-धीरे सिर को और कंधो को जमीन से ऊपर उठाइये। सिर को ऊपर उठाते समय श्वास अंदर लेना हैं।  
हाथो का अंदरूनी हिस्सा शरीर से स्पर्श कर रखे। 
8.हाथो पर अधिक दबाव न आने दे। 
9.अब धीरे-धीरे हाथों को कुंहनियो से सीधा कर, पूरी पीठ को पीछे की ओर झुकाना हैं। नाभी को जमीन से लगाकर रखे। इस स्तिथि में श्वास सामान्य रखे। इस स्तिथि में 20 से 30 सेकण्ड तक रुके और अभ्यास के साथ अंतराल बढ़ाये।  
11.इस अंतिम स्तिथि में कुछ देर रुकने के बाद धीरे-धीरे निचे आइए तथा पूर्व स्तिथि में विश्राम करे। यह क्रिया श्वास को बाहर छोड़ते हुए करना हैं।

        मत्स्यासन / Fish Pose :                                                                                       
यह आसन करते समय पदमासन में बैठकर गर्दन को पीछे की ओर झुकाकर लंबी साँसे लेना और छोड़ना पड़ता हैं जिससे Thyroid ग्रंथि को लाभ मिलता हैं।


        मत्स्यासन करने की विधि :                                                                                  
1.सबसे पहले पद्मासन लगाकर बैठ जाएँ।
2.फिर पद्मासन की स्थिति में ही सावधानीपूर्वक पीछे की ओर चित होकर लेट जाएँ।
3.ध्यान रहे कि लेटते समय दोनों घुटने जमीन से ही सटे रहें।
4.फिर दोनों हाथों की सहायता से शिखास्थान को भूमि पर टिकाएँ।
5.तत्पश्चात बाएँ पैर के अँगूठे और दोनों कोहनियों को भूमि से लगाए रखें।
6.एक मिनट से प्रारम्भ करके पाँच मिनट तक अभ्यास बढ़ाएँ।

7.फिर हाथ खोलकर हाथों की सहायता से सिर को सीधा कर कमर, पीठ को भूमि से लगाएँ। पुन: हाथों की सहायता से उठकर बैठ जाएँ।
8.आसन करते वक्त श्वास-प्रश्वास की गति सामान्य बनाए रखें। 

        मकरासन / Crocodile Pose :                                                                         
इस आसन में मगरमच्छ के समान गर्दन पर तनाव देना पड़ता है जिससे Thyroid ग्रंथि पर दबाव पड़ता हैं।


        मकरासन करने की विधि :                                                                                    
1.एक स्वच्छ और समान जगह पर चटाई बिछाकर यह आसन करे। 
2.पेट के बल लेट जाए। 
3.गर्दन को उठाना प्रारंभ करे और दोनों हाथो को कुंहनियो में मोड़कर कुंहनियो पर पर खड़ा कर दे। 
4.हथेलियों से ठुड्डी को आधार दे। 
5.गर्दन पर दबाव कर रहे इसलिए अपने कुंहनियो को फैला दे। कुंहनियो को इस प्रकार रखे की गर्दन और कमर पर कम दबाव रहे। 
6.दोनों पैरो के अंगूठे की दिशा एक दुसरे की दिशा एक दुसरे से विपरीत और एडियो की एक दुसरे की तरफ रखे। 
7.अब सम्पूर्ण शरीर को शिथिल रखे और आँख बंद कर धीरे-धीरे सांस ले। 
8.मकरासन और अन्य तरह से भी किया जाता है पर यहाँ पर सबसे उपयोगी और सरल विधि बताई गयी हैं। 
9.यह आसन अपने क्षमतानुसार करे। विशेष व्याधियो में लम्बे समय तक करे।

        शवासन / Corpse Pose :                                                                             
शवासन करने से मानसिक शांति मिलती हैं और तनाव दूर होता हैं।


        शवासन करने की विधि :                                                                                  
1.सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह पर दरी या चटाई बिछा दे। 
2.अब पीठ के बल लेट जाए। 
3.दोनों हाथों को शरीर से 6 इंच की दुरी पर रखे। 
4.हथेलियों को आसमान की ओर खुली रखे। 
5.दोनों पैरों को एक दुसरे से एक फुट दूर रखे। 
6.अब धीरे-धीरे पुरे शरीर को शिथिल करे। निचे से ऊपर तक शरीर के एक-एक अंग पर ध्यान देखर सभी अंगो को क्रमशः शिथिल करना हैं। 
7.मुंह और आँख बंद कर दे। 
8.धीरे-धीरे प्रयात्नराहित श्वसन करे। सारा ध्यान केवल श्वसन पर रखे और मन में किसी और विचार को नहीं आने देना है। 
9.आसन करते समय आहार नींद आने लगे तो लंबी और गहरी श्वास लेनी चाहिए।

        प्राणायाम / Pranayam :                                                                                     
सुखासन, पदमासन या वज्रासन में सीधे बैठकर बाए नाक से लम्बी और गहरी सांस लेना और दाए नाक से छोड़ना फिर यही क्रिया दाहिनी नाक से सांस लेना और बाए नाक से छोड़ना इस प्रकार लगातार 20 बार सुबह-शाम अभ्यास करना चाहिए।


प्राणायाम कई प्रकार के होते हैं इसलिए आपको अनुलोम विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम से शुरुआत करनी चाहिए | अनुलोम विलोम प्राणायाम और भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करें-

        हलासन / Plow Pose :                                                                               
हलासन करते समय गर्दन के ऊपर दबाव पड़ता है साथ ही वजन कम करने में मदद मिलती हैं|


        हलासन करने की विधि :                                                                                      
1. किसी साफ व समतल स्थान पर चटाई को बिछा लीजिए।
2. अब जमीन पर पीठ के बल लेटें।
3. पैर दोनों एक दूसरे से मिले हुए हों।
4. दोनों हाथों की हथेलियां जमीन पर और कमर के पास लगी हुई हों।
5. मुंह उपर आसमान की तरफ और आखें बंद करें।
6. अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को उपर की ओर उठाएं। एैसा करते समय पेट को सिकोड़ें और सांस को अंदर लें।
7. दोनों पैरों को सिर के पीछे लगाने कि कोशिश करें जैसा कि चित्र में बना हुआ है।
8. पीठ और कमर को पैरों के साथ पीछे की तरफ मोड़ने के लिए हाथों का सहारा लें।
9. अब धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार ही पैरों को मोंड़ें और थोड़ा रूकने का प्रयास करें।
10. घुटनें मुड़ें नहीं इस बात का ध्यान रखें।
11. अब वापस पहली अवस्था में आएं।

हलासन के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए और इसके लाभ संबंधी संपूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ click करे-Advantages of the 'Plough Pose' in yoga
 

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